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    महा शिवरात्रि 2026: शिव और पार्वती के दिव्य मिलन का जश्न, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और शक्तिशाली मंत्र!

    1 month ago

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों के लिए यह पर्व बेहद खास है. भगवान शिव और देवी पार्वती के पवित्र मिलन का प्रतीक शिवरात्रि भक्तों को शिवशक्ति से जुड़ने का मौका देता है.

    माना जाता है कि, इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वैवाहिक जीवन सामंजस्य बना रहता है. शास्त्रों के मुताबिक महाशिवरात्रि शिव से आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सुनहेरा मौका प्रदान करती है. 

    महाशिवरात्रि उत्सव और अनुष्ठान

    इस पवित्र मौके पर देशभर के शिव मंदिरों को खास सजावटों से सजाया जाता है. भक्त शिवलिंग अभिषेक के लिए जल, दूध, दही और शहद का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि इस साल कुछ जगहों पर महाशिवरात्रि की तिथि को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है. आइए जानते हैं कि, साल 2026 में यह त्योहार किस दिन मनाया जाएगा. 

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ये गलती की तो सालभर रहेगी परेशानी! पूजा से पहले जरूर जान लें नियम?

    महाशिवरात्रि 2026 की तिथि

    हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5.04 बजे से शुरू होगी.  यह तिथि 16 फरवरी को शाम 5.34 मिनट पर समाप्त होगी. इस तिथि के आधार पर महाशिवरात्रि 15 फरवरी, 2026 को मनाई जाएगी. 

    महाशिवरात्रि पूजा का समय

    प्रथम प्रहर पूजा शाम  06.39 बजे से रात 09.45 बजे तक
    दूसरे प्रहर की पूजा  रात 09.45 बजे से रात्रि 12.52 बजे तक
    तीसरा प्रहर की पूजा  सुबह 12.52 बजे से सुबह 03.59 बजे तक
    चौथे प्रहर की पूजा  सुबह 3.59 बजे से सुबह 07.06 बजे तक
    निशिता काल पूजा  12.28 बजे से लेकर 01.17 सुबह तक

    महाशिवरात्रि पर शुभ योग

    इस दिन कई लाभकारी सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं.

    उत्तरा आषाढ़ा और श्रवण नक्षत्रों का संयोजन भी बनेगा. 

    व्यातीपत योग दिन भर प्रभावी

    कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र का संयोग चतुर्ग्रही योग बनाएगा. भक्तों को 4 घंटे पूजा के दौरान शिव से जुड़े मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए. 

    • पूजा के लिए प्रथम प्रहर का मंत्र-'ह्रीं ईशानाय नमः'
    • पूजा के लिए दूसरे प्रहर का मंत्र- 'ह्रीं अघोराय नमः'
    • पूजा के लिए तीसरे प्रहर का मंत्र- 'ह्रीं वामदेवाय नमः'
    • पूजा के लिए चौथे प्रहर का मंत्र- 'ह्रीं सद्योजाताय नम:'

    भगवान शिव के शक्तिशाली मंत्र

    ॐ साधो जातये नमः। ॐ वं देवाय नमः।

    ॐ अघोराय नमः। ॐ तत्पुरुषाय नमः।

    ॐ ईशानाय नमः. ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।

    Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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