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    पाकिस्तान के बाद एक और मुस्लिम देश आया आगे, अमेरिका और ईरान में शांति समझौता कराने का किया वादा

    14 hours ago

    मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ क्षेत्रीय हालात पर बातचीत की. उन्‍होंने कहा क‍ि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने में मदद कर रहा है.

    शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, फोन बातचीत में सीसी ने कहा कि मिस्र विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ लगातार और गहन संपर्क में है, ताकि अमेरिका और ईरान के बीच एक व्यापक समझौता कराने में मदद मिल सके.

    उन्होंने कहा कि इस मामले में मिस्र का रुख अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और देशों की संप्रभुता और उनके संसाधनों के सम्मान पर आधारित है. वहीं, इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि फ्रांस क्षेत्र में स्थाई शांति स्थापित करने और मध्य पूर्व को अराजकता की ओर जाने से रोकने के लिए प्रयास कर रहा है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि होर्मुज स्‍ट्रेट खुला रहना चाहिए और वहां से जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगनी चाहिए.

    इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौता होने के काफी करीब पहुंच गए हैं. हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प बनी रहेगी.

    व्हाइट हाउस में फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके. ट्रंप ने कहा, 'हम एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं. अगर यह समझौता हो जाता है तो अच्छा है, नहीं तो फिर हमें सैन्य विकल्प पर आगे बढ़ना पड़ेगा.' उन्होंने दावा किया कि ईरान ऐसी शर्तों पर सहमत हो गया है जिनके तहत वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही हासिल करेगा.

    ट्रंप ने कहा, 'मेरे लिए सबसे जरूरी गारंटी यही है कि परमाणु हथियार नहीं होंगे. उन्होंने इस बात पर सहमति जताई है.' उन्होंने बताया कि जब उन्होंने यह चिंता जताई कि ईरान कहीं और से परमाणु हथियार खरीद सकता है, तो बातचीत की शर्तों को और विस्तृत किया गया.

    ट्रंप ने कहा, 'शुरुआत में उन्होंने कहा था कि हम परमाणु हथियार विकसित नहीं करेंगे. मैंने पूछा कि अगर आप किसी और से खरीद लें तो क्या होगा? अब इसमें यह भी शामिल है कि हम न तो परमाणु हथियार बनाएंगे और न ही किसी भी तरह से खरीदेंगे.' राष्ट्रपति ने बातचीत को कठिन बताया, लेकिन कहा कि धीरे-धीरे प्रगति हो रही है.

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    उन्होंने कहा क‍ि वे बहुत सख्त बातचीत करने वाले हैं. इसमें समय लगता है. लेकिन धीरे-धीरे हमें लगता है कि हम अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि वह बातचीत के जरिए समाधान निकालना पसंद करेंगे, लेकिन उन्होंने दोहराया कि अगर अमेरिका की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो वह कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे.

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